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'चक्रव्यूह' के मंचन के साथ भोपाल में इंडीमून्स नाट्य समारोह शुरू
चक्रव्यूह के तमाम कलाकार
- फोटो : शकील खान
राधव प्रकाश मिश्र की प्रकाश परिकल्पना प्रस्तुति को प्रभावी बनाने में अपने निर्देशक की भरपूर मदद करती है और खास रोल अदा करती है। संगीत भी लाइट के साथ सार्थक कदमताल करता नजर आता है। कलाकारों का अभिनय प्रस्तुति में चार चांद लगा देता है। नितीश और साहिल तो धुरी थे ही। भानु राणा (दुर्योधन), तरुण डंग (द्रोणाचार्य), ललित भारद्वाज (भीष्म) गौरव शर्मा (युधिष्ठिर), नवीन कुमार (शकुनि) भी अपने किरदारों के साथ न्याय करते हैं।
'चक्रव्यूह' क्यों? सवाल के जवाब में निर्देशक अतुल सत्य कौशिक के अनुसार पौराणिक कहानियों में नए तथ्य, व्याख्या और विवेचना अभी भी बची हुई है जो हमारे सामने आ रही है। इन कहानियों का समय पर खरा उतरना ही इनको कालजयी बनाता है।
इससे पहले दोपहर में इंडिमून्स आर्ट फेस्टिवल के सेंटर स्टेज कार्यक्रम के तहत क्लब लिटरेरी द्वारा 'मॉयथोलॉजी रूट्स ऑफ परफॉर्मेंस' टॉक शो हुआ। सीमा रायजादा के संचालन में हुए इस टॉक शो में नितीश भारद्वाज, पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा, डॉ अनुराधा शंकर, रामगोपाल सोनी और अतुल सत्य कौशिक ने अपने विचार साझा किए। नितीश का मानना है कि रामायण और महाभारत मिथ्य नहीं हमारी संस्कृति की महान धरोहर हैं। हरिनारायण चारी मिश्रा ने कहा कि रोजाना देखे जाने वाले अपराधों को समझने और समाधान खोजने में महाकाव्य मदद करते हैं। अनुराधा शंकर का कहना था कि मैथिली होने के कारण सीता उनकी प्रेरक और प्रिय हैं. रामगोपाल सोनी के अनुसार रामायण में बहुत महीन और विशाल भौगोलिक जानकारी मिलती है।
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