मुग़ल-ए-आज़म जैसी हर दिल अज़ीज़ फ़िल्म बनाने वाले के. आसिफ ने अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ ढाई फ़िल्मों का निर्देशन किया। ढाई इसलिए क्योंकि आख़िरी फ़िल्म 'लव एंड गॉड' वो पूरी नहीं बना पाए थे। इसके पहली ही उनकी मौत हो गई थी। इन डेढ़ फ़िल्मों के अलावा उन्होंने 1945 में रिलीज़ हुई फ़िल्म 'फूल' का निर्देशन किया था। बेहद कम फ़िल्में बनाकर हिंदी सिनेमा में शोहरत की बुलंदी को छूने वाले के. आसिफ़ पर एक बार जानलेवा हमला हुआ था। हालांकि, इस हमले में वो बच गए थे।
पेंगुइन से प्रकाशित संगीतकार नौशाद की जीवनी 'ज़र्रा जो आफ़ताब बना' में चौधरी ज़िया इमाम लिखते हैैं, "के. आसिफ़ साहब को याद करते हुए नौशाद साहब कहते हैं, फ़िल्म 'मोहब्बत और ख़ुदा' की शूटिंग के दौरान आसिफ़ साहब के साथ एक ज़बरदस्त घटना हुई थी। एक रात कुछ लोगों ने आसिफ़ साहब के बेडरूम में दाख़िल होकर आसिफ़ साहब और उनकी पत्नी अख़्तर पर जानलेवा हमला किया। हमलावरों ने घातक हमला किया। आक्रमणकारियों ने आसिफ़ साहब और अख़्तर की जान लेने का प्लान बनाया था और उन दोनों के सरों और चेहरों पर घातक वार किए थे। दोनों बेहोश हो गए, हमलावर यह सोचकर भाग गए कि दोनों मर गए।"
अगर के. आसिफ़ के पड़ोसी को हमले का पता नहीं चलता तो शायद वो वहीं बेहोश पड़े रहते। वो तो ख़ैर हुई की उनके पड़ोसी देवानंद जैसे हमदर्द फ़नकार थे। नौशाद साहब बताते हैं, "पड़ोसी देवानंद को पता चला तो उन्होंने पुलिस को फ़ोन किया और दोनों को नानावटी अस्पताल बहुंचाया। आसिफ़ साहब दो-तीन दिन तक बेहोश रहे। सर पर अधिक चोटें आने के कारण डॉक्टरों ने आसिफ़ साहब का सर मुंडवा दिया था। बाद में मुंबई के एक विशेषज्ञ प्लास्टिक सर्जन ने सर्जरी करके उनके चेहरे को संवारा और इस हद तक अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया कि उनके चेहरे पर, जो दो भागों में बंट गया था, एक भी निशान न रहा।"
के. आसिफ़ पर हुए हमले का राज़ आज तक पोशीदा है। इस राज़ से पर्दा ही नहीं उठा कि उनपर हमले के पीछे किसका हाथ था और हमला क्यों करवाया गया था? नौशाद बताते हैं,"किंतु यह राज़ आज तक राज़ ही है कि आसिफ़ साहब और उनकी पत्नी पर हमला किस उद्देश्य से किया गया था? यदि लुटेरों की साज़िश थी तो उनको घर का सामान, पैसा, गहने आदि भी चुराने चाहिए थे किंतु ऐसा नहीं हुआ था। अतः इससे यही परिणाम निकाला जा सकता है कि हत्यारे आसिफ़ साहब को और उनकी पत्नी की जान लेने नीयत से आए थे। बहरहाल आसिफ़ साहब ज़िंदगी के इस मुश्किल दौर से भी कामयाब होकर निकले।"
8 वर्ष पहले
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