आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भारतेंदु हरिश्चंद्र: उठा के नाज़ से दामन भला किधर को चले

bhartendu harishchandra famous ghazal utha ke naaz se daaman bhala kidhar ko chale
                
                                                         
                            


उठा के नाज़ से दामन भला किधर को चले
इधर तो देखिए बहर-ए-ख़ुदा किधर को चले

मिरी निगाहों में दोनों जहाँ हुए तारीक
ये आप खोल के ज़ुल्फ़-ए-दुता किधर को चले

अभी तो आए हो जल्दी कहाँ है जाने की
उठो न पहलू से ठहरो ज़रा किधर को चले

ख़फ़ा हो किस पे भंवें क्यूँ चढ़ी हैं ख़ैर तो है
ये आप तेग़ पे धर कर जिला किधर को चले

मुसाफ़िरान-ए-अदम कुछ कहो अज़ीज़ों से
अभी तो बैठे थे है है भला किधर को चले

चढ़ी हैं तेवरियाँ कुछ है मिज़ा भी जुम्बिश में
ख़ुदा ही जाने ये तेग़-ए-अदा किधर को चले

गया जो मैं कहीं भूले से उन के कूचे में
तो हँस के कहने लगे हैं 'रसा' किधर को चले

एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर