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विश्व काव्य: गुंटर कुनेर्ट, नींद-अचानक खुल पड़ी खिड़की... 

गुंटर कुनेर्ट
                
                                                         
                            जर्मनी के बड़े लेखक और कवि गुंटर कुनेर्ट ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक शासन की बजाय फेडरल रिपब्लिक शासन व्यवस्‍था को पसंद किया था। इनका जन्म 6 मार्च 1929 को हुआ था। इन्होंने संघीय शासन को तरजीह दी। कुनेर्ट स्वतंत्रता के लिए अधिकार की बजाय कर्त्तव्य की बात कहते हैं। 
                                                                 
                            

नींद...

तुम देख रहे हो
शताब्दी का सपना
जब तुम सपने में देखते हो
प्रशासकीय छायाओं को
वे कभी कोई चेहरा नहीं दिखातीं
सिर्फ वहीं प्रशासकीय शक्ल
और हरकतें
पिछले कई अनुभवों के कारण
परिचित
वे दिखाती हैं तुम्हें
तुम्हारा आतंक और उनका डर
टिखटियां
पेट की परत के आर-पार और उम्मीद
तुम्हारे देश की जमीन में
गहरे गाड़ी गई
उस लम्हे पर तुम भागना चाहते हो
कम से कम जाग पड़ना चाहते हो लेकिन
अगर ऐसा हो
तो तुम पाओगे कि तुम्हारा बिस्तर बहुत पहले से घेर लिया गया है
क्योंकि शताब्दी का सपना
एक नहीं है

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अचानक खुल पड़ी खिड़की...

8 वर्ष पहले

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