मुझे तुम पर भरोसा नहीं
वह ऐसे पेश आ रही है मानो हम कभी मिले ही नहीं
मैं समझ नहीं सकता
वह छोड़ देती है मेरा हाथ
छोड़ दिया है उसने मुझे दीवार की तरफ मुँह करके
मुझे यकीन है कि मुझे पता है
कि वह क्यों चली गई
लेकिन मैं उसके करीब बिल्कुल नहीं पहुँच सकता
हालाँकि हमने चुंबन किया जंगल की चमकती रात में
उसने कहा वह कभी नहीं भूलेगी
लेकिन अब सुबह स्पष्ट है
मानो कि मैं यहाँ हूँ ही नहीं
वह ऐसे पेश आ रही है मानो हम कभी मिले ही नहीं
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