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वायरल शायरी: मैं करूं भी तो किस बात का घमंड?

वायरल काव्य
                
                                                         
                            सोशल मीडिया पर हिट: मैं करूं भी तो किस बात का घमंड?
                                                                 
                            

मैं करूं भी तो किस बात का घमंड?
सूरज की रोशनी को भी मैंने रात के साये में ढलते देखा है।। 

रंजिशे हैं अगर दिल में कोई तो खुलकर गिला करो ।
मेरी फितरत ऐसी है कि मैं फिर भी हँस कर मिलूंगा ।। 

यूं तो सब कुछ सलामत है इस दुनिया में ।
बस कुछ रिश्ते टूटे-टूटे से नजर आते हैं ।। 

मसला तो सिर्फ एहसासों का है,जनाब ।
रिश्ते तो बिना मिले भी सदियां गुजार देते हैं।। 
 
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एक वर्ष पहले

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