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वायरल कविता : कब तक चुप रहेंगी लड़कियां

viral poem on police lathi charge on bhu student movement by vandana
                
                                                         
                            कब तक चुप रहेंगी लड़कियां 
                                                                 
                            

कब तक चुप रहेंगी लड़कियां,
कब तक अपमान सहेगी लड़कियां
कब तक संस्कारों की प्रतिमूति बनकर,
खुद में घुटती रहेगी लड़कियां
शांति सुकून से जीने दो उन्हें भी,
कब तक अपने ही आंगन में,
खुद को छिपायेगी लड़कियां
अपने सम्मान को पाने को,
खुद को अफ आवाज उठाने को,
कब तक लाठियों से पीटी जायेगी लड़कियां
नारी के तेज, तीखी, सम्मलित चीखें,
घुल रही महामना की बगिया में,
मत निकलों तुम बाहर शाम के
धुंधले अरमानों में,
अपनी व्यथा को अर्न्तमुखी करे के 
क्यों सहने को मजबूर हुई, रोज नये दुःशासन को
हर अबला बनेगी सबला अब तो,
नहीं सहेगी द्रोपदी सा चीरहरण अब लड़कियां
सरस्वती के आंगन में भी क्यूं ,
सहमी, संकूचाई है ये लड़कियां 
अपने अपने सपने लेकर
जाने कहा कहा से आयी है ये लड़कियां
जिस नवरात्र में पूजित होती लड़कियां,
अपने ही अस्मत की सुरक्षा को,
गुहार लगाती है ये लड़कियां
भूखी प्यासी बैठी सिहद्धार पे ,
ये कोमल कली मुरझाई सी लड़कियां
सिर मुड़ायगर्जन करे, शंखनाद सी गुर्राई है लड़कियां
कब तक चुप रहेंगी लड़कियां,
कब तक अपमान सहेगी लड़कियां

- वंदना यादव 

(ये कविता सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रही है।)
8 वर्ष पहले

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