विश्व की भाषा बने यह कल्पना
आओ हिंदी की सजाएं अल्पना
प्रेम हो, सद्भाव हो, सत्कार हो
मातृभाषा का जहां आधार हो
सर्व मंगल हो यही है कामना
आओ हिंदी की सजाएं अल्पना
संस्कृत से जन्म लेकर जब चली
फारसी, उर्दू, अरबी से मिली
नई शैली, रूप नव अभिव्यंजना
आओ हिंदी की सजाएं अल्पना
ज्ञान की गंगा बहाती जा रही
योग और विज्ञान भी सिखला रही
साहित्य संस्कृति की सनातन साधना
आओ हिंदी की सजाएं अल्पना
आन पहुंचे हैं समंदर पार जब
मातृभाषा का मिले आधार तब
अब सीखे सब हिंदी यही संकल्पना
विश्व की भाषा बने यह कल्पना
- रेखा राजवंशी
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