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Social Media Poetry: मैं आईना हूं तेरी यादों का

वायरल काव्य
                
                                                         
                            मैं आईना हूं तेरी यादों का 
                                                                 
                            
कभी मुझको देख संवर लेना।
मेरे आंसू तुम बनो न बनो 
मेरी आंखों में तुम ठहर लेना 
मेरी फितरत है पतंगों जैसी 
तेरे आसपास ही मंडराऊंगा।

तुम चिराग बन यूं ही जलते रहना 
अपने पहलू में मुझे जगह देना।
ये चांद ये तारे, ये मस्त नज़ारे 
तेरे साथ गुजारे, समय के हैं गवाह सारे।
इनको अदालत में तुम पेश करके 
मेरे कर्मों की तुम सजा देना।
मैं आईना हूं तेरी यादों का 
कभी मुझको देख संवर लेना।

-राकेश धर द्विवेदी 

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2 hours ago

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