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Kartavya path: प्रमिला दीक्षित की कविता 'देश पर जो हुआ न्यौछावर वो ही सुभाष कहलाता है'

pramila dixit hindi kavita on kartavya path desh par jo hua nyochhavar wo hi subhasha kahlata hai
                
                                                         
                            

कर्तव्यपथ

देश पर जो हुआ न्यौछावर
वो ही सुभाष कहलाता है।
नेताजी की जहां निगाह ताकती
वह स्वयं कर्तव्यपथ हो जाता है

गुलामी से मुक्ति तो पा ली
गुलाम सोच से मुक्ति बाक़ी थी,
बदल रहा है मेरा भारत
पुरानी बेड़ियों तोड़नी बाक़ी थी।

रेसकोर्स नहीं था साथियों
वो नाम हमपर चस्पा बाय फोर्स था
सड़क जहां जाकर है वो मिलती
उसे होना लोक कल्याण का सोर्स था।

अब देखो गणतंत्र ने स्वदेशी धुन है पकड़ी
स्व संस्कृति का अभिमान किया।
नौसेना के ध्वज ने देखो
वीर शिवाजी के शौर्य को प्रणाम किया

बजट हमारा हम तब सुनते थे
जब लंदन में सुबह होती थी
शिक्षा नीति भी हमारी
विदेशी सपनों को ढोती थी।

अंडमान के द्वीपों को भी
हमने आज़ाद ही नाम दिया।
ये आत्मनिर्भर भारत है।
विश्व को पैगाम दिया

अब नीति भी हम
निर्णायक भी हम
नए भारत के
नायक भी हम
संकल्प की सिद्धि कैसे ना होगी
पंच प्राण के धारक भी हम
पंच प्राण के वाहक भी हम

- प्रमिला दीक्षित

3 वर्ष पहले

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