रास्ते पर पाँव के निशान की तरह छूटना
और आँख में अधूरी नींद की तरह
किसी के दिल में छूटने के लिए
मत तलाशना कोई उपमा
वहाँ जैसे हो वैसे ही छूट जाना
छूटना किसी के हाथ से तलवार की तरह
तो किसी के हाथ से शराब के प्याले सा
अंधे की लाठी जैसे छूटती है हाथों से
वैसे न छूटना कभी
चाहे पड़े रहना प्रतीक्षा में बसंत की
और मौसम उदास बैठा रहे अनमने कबूतर सा मन की मुंडेर पर
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