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लाल के हुंकार से, भाले के प्रहार से - संजय सिंघई

hindi kavita for Olympic gold medalist neeraj chopra
                
                                                         
                            ओलंपिक में भाला फेंक, स्वर्ण पदक विजेता नीरज चौपड़ा को समर्पित
                                                                 
                            

गूंज गया गगन,
कांप गई पवन,
वेग के प्रताप से,
इंद्रधनुषी चाल से
गड़ गया भाला,
धस गई धरती,
लाल के हुंकार से,
भाले के प्रहार से।

बाहुओं में फ़ौलाद,
कदमों मेँ बिजलियां,
नयनों के सपने,
भाले ने किए पूरे,
अरमान जो थे अधूरे।

राणा की संतान हैं हम,
स्वर्ण इतिहास रच जाएंगे,
घास की रोटी का जीवन,
भाले को चमकाएंगे,
आन, मातृभूमि की ख़ातिर,
शान से दुहराएंगे।
अवनी से अम्बर तक
क्षितिज पार,
भारत मां की भाल ,
नवकांतिमय, तिलक
श्रृंगारित कर जाएंगे।

- संजय सिंघई,
जबलपुर
5 वर्ष पहले

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