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Social Media Poetry: सच कहता हूँ मुझको उस दिन याद तुम्हारी आयेगी

सोशल मीडिया
                
                                                         
                            सच कहता हूँ मुझको उस दिन याद तुम्हारी आयेगी 
                                                                 
                            
जिस दिन इस  कुटिया में  कोई राजकुमारी आयेगी !

अक्सर मेरे  प्रस्तावों पर तुम यों ही गुमसुम ठहरीं 
मैं धरती से रहा ताकता तुम आकाशकुसुम ठहरीं
आखिर किसी और के माथे 
का   चंदन   कुंकुम    ठहरीं
मैं क्या करता क्या ही करता
तुम  तो  आखिर  तुम ठहरीं
जल्दी उतरो, इसी  नाव  पर और सवारी आयेगी !

मेरा  मन  था  एक  जनम यह मेरे संग बिताती तुम
मन के इकतारे पर मुझको जीवन गीत सुनाती तुम
सोच रहा हूँ अगर जनम भर
मेरा   साथ     निभाती   तुम
तो  फिर  तुमने  जो पाया है 
उसको    कैसे    पाती   तुम 
तुम्हें  पता  है  एक  दिवस मेरी भी बारी आयेगी !

अच्छा होता यदि तुम इस कुटिया को महल बना देती
मेरे जीवन की बहरों पर कोई  गजल बना देती 
हाथ   छापती  दरवाजे  पर 
अठदल  कमल  बना  देती 
मुश्किल है  पर तुम रहती 
तो जीवन सरल बना देती 
दिन   बीतेंगे   याद  तुम्हें  भी  मीठी  खारी  आयेगी !
सच कहता हूँ मुझको उस दिन याद तुम्हारी आयेगी !
जिस दिन इस  कुटिया में  कोई राजकुमारी आयेगी !

साभार:  ज्ञानप्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

2 वर्ष पहले

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