राम हैं अनंत और अंत से विहीन हैं,
हारते हुओं के लिए जीत का यकीन हैं,
समय से सनातन विचार से नवीन राम ,
मानस के केंद्र मन मानस पर आसीन हैं,
राम काव्य लय छंद ताल का भी सार हैं,
राम शब्द अर्थ और रस अलंकार हैं,
राम रचना हैं और रचना का केंद्रबिंदु,
राम अभिव्यक्तियों में आदि औ नवीन हैं।
राम सत्य कर्म राम पूजा और धर्म राम,
तीर्थों के तीर्थ और धामों के वे धाम हैं ,
राम मन्त्र ध्यान राम ऋचा और श्लोक राम,
राम ऋग्वेद से भी वेद प्राचीन हैं।
राम तेज ज्योति राम समय राम गति राम,
राम स्रोत चिंतन का कथ्य और मति राम,
राम आस्था हैं विश्वास हैं उपासना हैं,
लोकल्याण हित राम स्वार्थहीन हैं।
साभार: अनुपम पाठक अनुपम की फेसबुक वाल से
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