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Ziya Mazkoor Poetry: मेरे कमरे में इक ऐसी खिड़की है

उर्दू अदब
                
                                                         
                            मेरे कमरे में इक ऐसी खिड़की है 
                                                                 
                            
जो इन आँखों के खुलने पर खुलती है 

ऐसे तेवर दुश्मन ही के होते हैं 
पता करो ये लड़की किस की बेटी है 

रात को इस जंगल में रुकना ठीक नहीं 
इस से आगे तुम लोगों की मर्ज़ी है 

मैं इस शहर का चाँद हूँ और ये जानता हूँ 
कौन सी लड़की किस खिड़की में बैठी है  आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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