चलो इतनी तो आसानी रहेगी
मिलेंगे और परेशानी रहेगी
इसी से रौनक़-ए-दरिया-ए-दिल है
यही इक लहर तूफ़ानी रहेगी
कभी ये शौक़ ना-मानूस होगा
कभी वो शक्ल अनजानी रहेगी
निकल जाएगी सूरत आइने से
हमारे घर में हैरानी रहेगी
सुबुक-सर हो के जीना है कोई दिन
अभी कुछ दिन गिराँ-जानी रहेगी
सुनोगे लफ़्ज़ में भी फड़फड़ाहट
लहू में भी पर-अफ़्शानी रहेगी
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