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Hindi Shayari: वाली आसी- फैलता जाता है नफ़रत का धुआँ इश्क़ करो

उर्दू अदब
                
                                                         
                            फैलता जाता है नफ़रत का धुआँ इश्क़ करो 
                                                                 
                            
बुझ न जाए कहीं ये शो'ला-ए-जाँ इश्क़ करो 

इश्क़ बिन जीने के आदाब नहीं आते हैं 
'मीर' साहब ने कहा है कि मियाँ इश्क़ करो 

कज-अदाई न फ़क़ीरों को दिखाओ यारो 
एक शब के लिए मेहमाँ हैं यहाँ इश्क़ करो  आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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