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Urdu Poetry: ताज भोपाली की ग़ज़ल 'ये जो कुछ आज है कल तो नहीं है'

taj bhopali famous ghazal ye jo kuch aaj hai kal toh nahin hai
                
                                                         
                            


ये जो कुछ आज है कल तो नहीं है
ये शाम-ए-ग़म मुसलसल तो नहीं है

मैं अक्सर रास्तों पर सोचता हूँ
ये बस्ती कोई जंगल तो नहीं है

यक़ीनन तुम में कोई बात होगी
ये दुनिया यूँही पागल तो नहीं है

मैं लम्हा लम्हा मरता जा रहा हूँ
मिरा घर मेरा मक़्तल तो नहीं है

किसी पर छा गया बरसा किसी पर
वो इक आवारा बादल तो नहीं है 


 

2 वर्ष पहले

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