देखने वाले मिरी ख़ामोशी-ए-लब को न देख
आँखों आँखों में फ़साना कह दिया करता हूँ मैं
ग़म है कि एक तल्ख़ हक़ीक़त है आज-कल
दिल है कि सोगवार-ए-मोहब्बत है आज-कल
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