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Shayari: शाम पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

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शाम बे-कैफ़ सही शाम है ढल जाएगी
दिन भी निकलेगा तबीअ'त भी सँभल जाएगी
- जलील निज़ामी 


भटकी है उजालों में नज़र शाम से पहले
ये शाम ढले का सा असर शाम से पहले
- सज्जाद बाबर

चाँद तारों की जो महफ़िल थी सजी शाम के बाद
मुझ को महसूस हुई तेरी कमी शाम के बाद
- उस्मान शाहीन 


किस काँधे पर अश्क बहाऊँ शाम गए
किस को अपने ज़ख़्म दिखाऊँ शाम गए
- आयाज़ रसूल नाज़की 

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4 वर्ष पहले

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