शाम बे-कैफ़ सही शाम है ढल जाएगी
दिन भी निकलेगा तबीअ'त भी सँभल जाएगी
- जलील निज़ामी
भटकी है उजालों में नज़र शाम से पहले
ये शाम ढले का सा असर शाम से पहले
- सज्जाद बाबर
चाँद तारों की जो महफ़िल थी सजी शाम के बाद
मुझ को महसूस हुई तेरी कमी शाम के बाद
- उस्मान शाहीन
किस काँधे पर अश्क बहाऊँ शाम गए
किस को अपने ज़ख़्म दिखाऊँ शाम गए
- आयाज़ रसूल नाज़की
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