शाम बे-कैफ़ सही शाम है ढल जाएगी
दिन भी निकलेगा तबीअ'त भी सँभल जाएगी
- जलील निज़ामी
भटकी है उजालों में नज़र शाम से पहले
ये शाम ढले का सा असर शाम से पहले
- सज्जाद बाबर
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