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Sahir Ludhianvi Poetry: जाने वो कैसे लोग थे जिन को प्यार से प्यार मिला

उर्दू अदब
                
                                                         
                            जाने वो कैसे लोग थे जिन को प्यार से प्यार मिला 
                                                                 
                            
हम ने तो जब कलियाँ माँगीं काँटों का हार मिला 
ख़ुशियों की मंज़िल ढूँडी तो ग़म की गर्द मिली 
चाहत के नग़्मे चाहे तो आह-ए-सर्द मिली 

दिल के बोझ को दूना कर गया जो ग़म-ख़्वार मिला 
बिछड़ गया हर साथी दे कर पल-दो-पल का साथ 
किस को फ़ुर्सत है जो थामे दीवानों का हाथ 
हम को अपना साया तक अक्सर बेज़ार मिला 
इस को ही जीना कहते हैं तो यूँ ही जी लेंगे 
उफ़ न करेंगे लब सी लेंगे आँसू पी लेंगे 
ग़म से अब घबराना कैसा ग़म सौ बार मिला 
2 वर्ष पहले

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