आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Sahir Ludhianvi Poetry: मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

sahir ludhianvi famous urdu nazm maine chand aur sitaron ki tamanna ki thi
                
                                                         
                            

मैंने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी
मुझ को रातों की सियाही के सिवा कुछ न मिला

मैं वो नग़्मा हूँ जिसे प्यार की महफ़िल न मिली
वो मुसाफ़िर हूँ जिसे कोई भी मंज़िल न मिली
ज़ख़्म पाए हैं बहारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

किसी गेसू किसी आँचल का सहारा भी नहीं
रास्ते में कोई धुँदला सा सितारा भी नहीं
मेरी नज़रों ने नज़ारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

दिल में नाकाम उमीदों के बसेरे पाए
रौशनी लेने को निकला तो अँधेरे पाए
रंग और नूर के धारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

मेरी राहों से जुदा हो गईं राहें उन की
आज बदली नज़र आती हैं निगाहें उन की
जिन से इस दिल ने सहारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

प्यार माँगा तो सिसकते हुए अरमान मिले
चैन चाहा तो उमड़ते हुए तूफ़ान मिले
डूबते दिल ने किनारों की तमन्ना की थी
मैं ने चाँद और सितारों की तमन्ना की थी

2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर