दर्द दुनिया भर का सीने में लिए जाते हैं हम
ज़िंदगी जीने की मजबूरी जिए जाते हैं हम
अपने दामन से छुड़ा अब कहते ग़ैरों का हुआ
बे-ख़ता दोहरी सज़ाएँ भी पिए जाते हैं हम
यूँ तो ये बाज़ार महफ़िल पर सभी वीरान हैं
फिर भी वीराने में आवाज़ें दिए जाते हैं हम
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