आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Urdu Ghazal: राजेश रेड्डी की ग़ज़ल 'सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले, ये जो अब दश्त है दरिया था पहले'

rajesh reddy ghazal suna hai ye jahan achcha tha pahle ye jo ab dasht hai dariya tha pahle
                
                                                         
                            

सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले
ये जो अब दश्त है दरिया था पहले

जो होता कौन आता इस जहाँ में
किसे दुनिया का अंदाज़ा था पहले

बड़ी तस्वीर लटका दी है अपनी
जहाँ छोटा सा आईना था पहले

समझ में कुछ नहीं आता अब उस की
वो जो औरों को समझाता था पहले

किया ईजाद जिस ने भी ख़ुदा को
वो ख़ुद को कैसे बहलाता था पहले

बहुत कुछ भी नहीं काफ़ी यहाँ अब
बहुत थोड़े से चल जाता था पहले

ये दीवारें तो हैं इस दौर का सच
खुला हर दिल का दरवाज़ा था पहले

3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर