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राहत इंदौरी की ग़ज़ल- तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के

राहत इंदौरी(फाइल फोटो)
                
                                                         
                            तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के 
                                                                 
                            
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के 

आते जाते हैं कई रंग मिरे चेहरे पर 
लोग लेते हैं मज़ा ज़िक्र तुम्हारा कर के 
 

एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे 
वो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के 
 
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3 वर्ष पहले

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