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Gulzar Poetry: मुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझको

promise day poetry gulzar poetry mujhse ek nazm ka vaada hai milegi mujhko
                
                                                         
                            

मुझसे इक नज़्म का वादा है,
मिलेगी मुझको
डूबती नब्ज़ों में,
जब दर्द को नींद आने लगे
ज़र्द सा चेहरा लिए चाँद,
उफ़क़ पर पहुंचे
दिन अभी पानी में हो,
रात किनारे के क़रीब
न अँधेरा, न उजाला हो,
यह न रात, न दिन
ज़िस्म जब ख़त्म हो
और रूह को जब सांस आए
मुझसे इक नज़्म का वादा है मिलेगी मुझको

2 वर्ष पहले

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