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नज़ीर बनारसी: कितनी शर्मीली लजीली है हवा बरसात की

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कितनी शर्मीली लजीली है हवा बरसात की 
                                                                 
                            
मिलती है उन की अदा से हर अदा बरसात की 

जाने किस महिवाल से आती है मिलने के लिए 
सोहनी गाती हुई सौंधी हवा बरसात की 

उस के घर भी तुझ को आना चाहिए था ऐ बहार 
जिस ने सब के वास्ते माँगी दुआ बरसात की 

अब की बारिश में न रह जाए किसी के दिल में मैल 
सब की गगरी धो के भर दे ऐ घटा बरसात की 

देखिए कुछ ऐसे भी बीमार हैं बरसात के 
बोतलों में ले के निकले हैं दवा बरसात की 

जेब अपनी देख कर मौसम से यारी कीजिए 
अब की महँगी है बहुत आब-ओ-हवा बरसात की  आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

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