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इब्न-ए-इंशा: जाने तू क्या ढूँढ़ रहा है बस्ती में वीराने में

ibn e insha famous ghazal jane tu kya dhoondh raha hai baste mein veerane mein
                
                                                         
                            


जाने तू क्या ढूँढ रहा है बस्ती में वीराने में
लैला तो ऐ क़ैस मिलेगी दिल के दौलत-ख़ाने में

जनम जनम के सातों दुख हैं उस के माथे पर तहरीर
अपना आप मिटाना होगा ये तहरीर मिटाने में

महफ़िल में उस शख़्स के होते कैफ़ कहाँ से आता है
पैमाने से आँखों में या आँखों से पैमाने में

किस का किस का हाल सुनाया तू ने ऐ अफ़्साना-गो
हम ने एक तुझी को ढूँढ़ा इस सारे अफ़्साने में

इस बस्ती में इतने घर थे इतने चेहरे इतने लोग
और किसी के दर पे न पहुँचा ऐसा होश दिवाने में

5 महीने पहले

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