रास्ते क़हक़हे लगाने लगे
वापसी का मज़ा नहीं आया
~ अदनान नसीर
तुम्हारा गाँव आएगा सफ़र में
सो खिड़की की तरफ़ बैठे नहीं हम
~ दीपेश शर्मा सौभरि
इक मुद्दत का प्यासा ये कैसे समझे
दरिया के आगे भी रस्ता जाता है
~ दीपेश शर्मा सौभरि
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहां
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहां
~ ख़्वाजा मीर दर्द
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