महक रही है ज़मीं चाँदनी के फूलों से
ख़ुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है
~ बशीर बद्र
याद के चाँद दिल में उतरते रहे
चाँदनी जगमगाती रही रात भर
~ मख़दूम मुहिउद्दीन
रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो
दिन की चादर अभी उतारी है
~ गुलज़ार
बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी
~ परवीन शाकिर
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