है मोहब्बत इस वतन से अपनी मिट्टी से हमें
इस लिए अपना करेंगे जान-ओ-तन क़ुर्बान हम
~अज्ञात
भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ
दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ
~ लाल चन्द फ़लक
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी
~ लाल चन्द फ़लक
वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे
मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
~ मुज़फ़्फ़र वारसी
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