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Diwali 2023: शातिर हकीमी की नज़्म- आसमानों पर सितारे जगमगाएँ जिस तरह

उर्दू अदब
                
                                                         
                            रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है 
                                                                 
                            
वक़्त के माथे पे शोख़ी भी है भोला-पन भी है 

बाम-ओ-दर पर आज मिट्टी के दिए हैं इस तरह 
आसमानों पर सितारे जगमगाएँ जिस तरह 

रास्तों पर हैं दनादन की सदाएँ ख़ौफ़नाक 
ज़िंदगी से मौत गोया कर रही है ताक-झाँक 

हो रही हैं हर गली-कूचे में आतिश-बाज़ियाँ 
आर रहा है अब्र की सूरत तमव्वुल का धुआँ 

कर रहे हैं लक्ष्मी-पूजन भी घरों में साहूकार 
देव दौलत को समझ बैठे हैं रब्ब-ए-इक़्तिदार 

हिन्द वालों को मरज़ है नारवा तक़लीद का 
आज घर में सेठ-जी भी खेल लेते हैं जुआ 

हो सके तो छोड़ दे रस्म-ए-कोहन मर्द-ए-जवाँ 
ता-ब-कै दोहराए जाएगा फ़सुर्दा दास्ताँ 

अक़्ल से कुछ काम ले हिन्दोस्ताँ पर रहम कर 
आज भी लाखों घरों में है अंधेरे का गुज़र 

होश में आ ख़्वाब से बेदार हो ऐ वक़्फ़-ए-नौम 
मुल्क पर तेरे हुकूमत कर रही है ग़ैर क़ौम 

मर्द है तू काम ले हिम्मत से रोना छोड़ दे 
नाम ले अर्जुन का ज़ंजीर-ए-ग़ुलामी तोड़ दे 

हिन्द की ख़्वाबीदा क़िस्मत को जगाना चाहिए 
शौक़ से फिर तुझ को दीवाली मनाना चाहिए 

2 वर्ष पहले

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