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Firaq Gorakhpuri shayari: फ़िराक़ के ख़ज़ाने से चुनिंदा शेर

उर्दू अदब
                
                                                         
                            उसी दिल की क़िस्मत में तन्हाइयाँ थीं 
                                                                 
                            
कभी जिस ने अपना पराया न जाना 

दिलों को तेरे तबस्सुम की याद यूँ आई 
कि जगमगा उठें जिस तरह मंदिरों में चराग़ 

जिन की ता'मीर इश्क़ करता है 
कौन रहता है उन मकानों में आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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