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Dushyant Kumar Poetry: तुम्हीं से प्यार जताएँ तुम्हीं को खा जाएँ

dushyant kumar famous ghazal tumhare panvon ke neeche koi zameen nahin
                
                                                         
                            


तुम्हारे पाँवों के नीचे कोई ज़मीन नहीं,
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं।

मैं बेपनाह अँधेरों को सुबह कैसे कहूँ,
मैं इन नज़ारों का अंधा तमाशबीन नहीं।

तेरी ज़ुबान है झूठी जम्हूरियत की तरह,
तू एक ज़लील-सी गाली से बेहतरीन नहीं।

तुम्हीं से प्यार जताएँ तुम्हीं को खा जाएँ,
अदीब यों तो सियासी हैं कमीन नहीं।

तुझे क़सम है ख़ुदी को बहुत हलाक न कर,
तू इस मशीन का पुर्ज़ा है, तू मशीन नहीं।

बहुत मशहूर है आएँ ज़रूर आप यहाँ,
ये मुल्क देखने के लायक़ तो है, हसीन नहीं।

ज़रा-सा तौर-तरीक़ों में हेर-फेर करो,
तुम्हारे हाथ में कॉलर हो, आस्तीन नहीं।
 

10 महीने पहले

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