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अज़हर इक़बाल: दिल की गली में चाँद निकलता रहता है

azhar iqbal famous ghazal dil ki gali mein chand nikalta rehta hai
                
                                                         
                            


दिल की गली में चाँद निकलता रहता है
एक दिया उम्मीद का जलता रहता है

जैसे जैसे यादों कि लौ बढ़ती है
वैसे वैसे जिस्म पिघलता रहता है

सरगोशी को कान तरसते रहते हैं
सन्नाटा आवाज़ में ढलता रहता है

मंज़र मंज़र जी लो जितना जी पाओ
मौसम पल पल रंग बदलता रहता है

राख हुई जाती है सारी हरियाली
आँखों में जंगल सा जलता रहता है

तुम जो गए तो भूल गए सारी बातें

एक वर्ष पहले

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