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Asrar Ul Haq Majaz nazm: बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है

उर्दू अदब
                
                                                         
                            बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है 
                                                                 
                            
मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वो इस दुनिया की औरत है 
सरापा रंग-ओ-बू है पैकर-ए-हुस्न-ओ-लताफ़त है 
बहिश्त-ए-गोश होती हैं गुहर-अफ़्शानियाँ उस की 

वो मेरे आसमाँ पर अख़्तर-ए-सुब्ह-ए-क़यामत है 
सुरय्या-बख़्त है ज़ोहरा-जबीं है माह-ए-तलअत है 
मिरा ईमाँ है मेरी ज़िंदगी है मेरी जन्नत है 
मेरी आँखों को ख़ीरा कर गईं ताबानियाँ उस की 

वो इक मिज़राब है और छेड़ सकती है रग-ए-जाँ को 
वो चिंगारी है लेकिन फूँक सकती है गुलिस्ताँ को 
वो बिजली है जला सकती है सारी बज़्म-ए-इम्काँ को 
अभी मेरे ही दिल तक हैं शरर-सामानियाँ उस की 

ज़बाँ पर हैं अभी इस्मत ओ तक़्दीस के नग़्मे 
वो बढ़ जाती है इस दुनिया से अक्सर इस क़दर आगे 
मिरे तख़्ईल के बाज़ू भी उस को छू नहीं सकते 
मुझे हैरान कर देती हैं नुक्ता-दानियाँ उस की  आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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