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अंजुम रहबर: इक ख़त छुपा रही थी कि तुम याद आ गए

उर्दू अदब
                
                                                         
                            तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए
                                                                 
                            
मैं ज़हर खा रही थी कि तुम याद आ गए

कल मेरी एक प्यारी सहेली किताब में
इक ख़त छुपा रही थी कि तुम याद आ गए

उस वक़्त रात-रानी मिरे सूने सहन में
ख़ुशबू लुटा रही थी कि तुम याद आ गए

ईमान जानिए कि इसे कुफ़्र जानिए
मैं सर झुका रही थी कि तुम याद आ गए

कल शाम छत पे मीर-तक़ी-'मीर' की ग़ज़ल
मैं गुनगुना रही थी कि तुम याद आ गए

'अंजुम' तुम्हारा शहर जिधर है उसी तरफ़
इक रेल जा रही थी कि तुम याद आ गए

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47 मिनट पहले

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