आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Allama Iqbal Famous Nazm: आता है याद मुझ को गुज़रा हुआ ज़माना

उर्दू अदब
                
                                                         
                            आता है याद मुझ को गुज़रा हुआ ज़माना 
                                                                 
                            
वो बाग़ की बहारें वो सब का चहचहाना 
आज़ादियाँ कहाँ वो अब अपने घोंसले की 
अपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना 
लगती है चोट दिल पर आता है याद जिस दम 
शबनम के आँसुओं पर कलियों का मुस्कुराना 
वो प्यारी प्यारी सूरत वो कामनी सी मूरत 
आबाद जिस के दम से था मेरा आशियाना 
आती नहीं सदाएँ उस की मिरे क़फ़स में 
होती मिरी रिहाई ऐ काश मेरे बस में 

क्या बद-नसीब हूँ मैं घर को तरस रहा हूँ 
साथी तो हैं वतन में मैं क़ैद में पड़ा हूँ 
आई बहार कलियाँ फूलों की हंस रही हैं 
मैं इस अँधेरे घर में क़िस्मत को रो रहा हूँ 
इस क़ैद का इलाही दुखड़ा किसे सुनाऊँ 
डर है यहीं क़फ़स में मैं ग़म से मर न जाऊँ 
आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर