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Urdu Ghazal: अब्दुल हमीद अदम- लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला

उर्दू अदब
                
                                                         
                            लहरा के झूम झूम के ला मुस्कुरा के ला 
                                                                 
                            
फूलों के रस में चाँद की किरनें मिला के ला 

कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं 
जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला 

साग़र-शिकन है शैख़-ए-बला-नोश की नज़र 
शीशे को ज़ेर-ए-दामन-ए-रंगीं छुपा के ला 

क्यूँ जा रही है रूठ के रंगीनी-ए-बहार 
जा एक मर्तबा उसे फिर वर्ग़ला के ला 

देखी नहीं है तू ने कभी ज़िंदगी की लहर 
अच्छा तो जा 'अदम' की सुराही उठा के ला 

2 वर्ष पहले

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