छात्रा महक अरोड़ा का कहना है कि कई वर्षों से महिलाएं बहुत कुछ झेल रही हैं। महिलाओं को निर्णय लेने के अधिकार तक से वंचित रखा गया। आज भी कई क्षेत्रों में माहवारी के दौरान बच्चियां स्कूल जानें से मना किया जाता है, इसलिए अब हम युवाओं को इस मुद्दे पर खुलकर बात करनी होगी।
बाल विकास की बात करें तो न्यूट्रिशन और पेरेंटिंग से साथ ही साथ सामाजिक रीति रिवाज और पर्यावरण मुख्य कारक हैं।
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