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शैल चतुर्वेदी की गुदगुदाती हुई कविता- मिल गया भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार पर शैल चतुर्वेदी की गुदगुदाती हुी कविता- मिल गया भ्रष्टाचार
                
                                                         
                            हमारे लाख मना करने पर भी
                                                                 
                            
हमारे घर के चक्कर काटता हुआ
मिल गया भ्रष्टाचार

हमने डांटा : नहीं मानोगे यार
तो बोला : चलिए 

आपने हमें यार तो कहा
अब आगे का काम
हम सम्भाल लेंगे
आप हमको पाल लीजिए
आपके बाल-बच्चों को
हम पाल लेंगे

हमने कहा : भ्रष्टाचार जी!
किसी नेता या अफ़सर के
बच्चे को पालना
और बात है
इन्सान के बच्चे को पालना
आसान नहीं है

वो बोला : जो वक्त के साथ नहीं चलता
इंसान नहीं है आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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