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आज का शब्द: वट और अज्ञेय की कविता- बोलो, चाहे धीरे-धीरे बोलो

हिंदी हैं हम
                
                                                         
                            वट का अर्थ है- बरगद का पेड़। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- वट। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- बोलो, चाहे धीरे-धीरे बोलो
                                                                 
                            


आओ बैठें 
इसी ढाल की हरी घास पर। 
माली-चौकीदारों का यह समय नहीं है, 
और घास तो अधुनातन मानव-मन की भावना की तरह 
सदा बिछी है—हीर, न्यौतती, कोई आ कर रौंदे। 

आओ, बैठो। 
तनिक और सट कर, कि हमारे बीच स्नेह-भर का व्यवधान रहे, 
बस, 
नहीं दरारें सभ्य शिष्ट जीवन की। 

चाहे बोलो, चाहे धीरे-धीरे बोलो, स्वगत गुनगुनाओ, 
चाहे चुप रह जाओ— 
हो प्रकृतस्थ : तनो मत कटी-छँटी उस बाड़ सरीखी, 
नमो, खुल खिलो, सहज मिलो 
अंत:स्मित, अंत:संयत हरी घास-सी।  आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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