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आज का शब्द: तुमुल और जयशंकर प्रसाद की कविता- मैं हृदय की बात रे मन !

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- तुमुल, जिसका अर्थ है- सेना या युद्ध का कोलाहल, गहरी मुठभेड़। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता- मैं हृदय की बात रे मन !
                                                                 
                            

तुमुल कोलाहल कलह में
मैं हृदय की बात रे मन !

विकल होकर नित्य चंचल,
खोजती जब नींद के पल;
चेतना थक-सी रही तब,
मैं मलय की वात रे मन !

चिर विषाद विलीन मन की,
इस व्यथा के तिमिर वन की;
मैं उषा-सी ज्योति रेखा,
कुसुम विकसित प्राण रे मन !

जहाँ मरु ज्वाला धधकती,
चातकी कन को तरसती;
उन्हीं जीवन घाटियों की,
मैं सरस बरसात रे मन !

पवन की प्राचीर में रुक,
जला जीवन जी रहा झुक;
इस झुलसते विश्व-दिन की,
मैं कुसुम-ऋतु रात रे मन !

चिर निराशा नीरधर से,
प्रचिच्छायित अश्रु-सर में;
मधुप मुखर मरन्द मुकुलित,
मैं सजल जलजाल रे मन !

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एक महीने पहले

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