हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है स्तव जिसका अर्थ है - किसी देवता की छंदोबद्ध स्तुति, प्रशंसा। कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!
लंका पदतल शतदल
गर्जितोर्मि सागर-जल,
धोता शुचि चरण युगल
स्तव कर बहु-अर्थ-भरे।
तरु-तृण-वन-लता वसन,
अंचल में खचित सुमन,
गंगा ज्योतिर्जल-कण
धवल-धार हार गले।
मुकुट शुभ्र हिम-तुषार,
प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
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