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आज का शब्द: संपुटित और केदारनाथ सिंह की कविता 'खोल दूं यह आज का दिन'

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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है  संपुटित जिसका अर्थ है 1. अंजलि या दोने के रूप में लाया हुआ 2. एकत्र। कवि केदारनाथ सिंह ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

खोल दूं यह आज का दिन
जिसे-
मेरी देहरी के पास कोई रख गया है,
एक हल्दी-रंगे
ताजे
दूर देशी पत्र-सा।
थरथराती रोशनी में,
हर संदेशे की तरह
यह एक भटका संदेश भी
अनपढ़ा ही रह न जाए-
सोचता हूँ
खोल दूं।
इस संपुटित दिन के सुनहले पत्र-को
जो द्वार पर गुमसुम पडा है,
खोल दूं।

पर, एक नन्हा-सा
किलकता प्रश्न आकर
हाथ मेरा थाम लेता है,
कौन जाने क्या लिखा हो?
(कौन जाने अंधेरे में- दूसरे का पत्र मेरे द्वारा कोई रख गया हो)
कहीं तो लिखा नहीं है
नाम मेरा,
पता मेरा,
आह! कैसे खोल दूं।

हाथ,
जिसने द्वार खोला,
क्षितिज खोले
दिशाएं खोलीं,
न जाने क्यों इस महकते
मूक, हल्दी-रंगे, ताजे,
किरण-मुद्रित संदेशे को
खोलने में कांपता है। 
 

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3 महीने पहले

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