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आज का शब्द: रन्ध्र और रवीन्द्र भ्रमर की कविता- मीत नहीं आए

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- रन्ध्र, जिसका अर्थ है- छिद्र। प्रस्तुत है रवीन्द्र भ्रमर की कविता- मीत नहीं आए 
                                                                 
                            

पथ अगोरते लाज लुट गई
मीत नहीं आए ।

रन्ध्र रन्ध्र रिस गई बांसुरी
पोर पोर रीते,
स्वर संवारते बेला रूठी
गीत नहीं आए ।

पँखुरियाँ मुरझीं पंकज की — 
मुख छवि म्लान हुई,
नयन नीर रीते
दुख के दिन बीत नहीं पाए ।

एक लाग है, एक लगन है
उन्हें रिझाने की,
इतनी आयु गवांकर
अब तक जीत नहीं पाए ।

पथ अगोरते लाज लुट गई
मीत नहीं आए ।

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एक महीने पहले

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