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आज का शब्द: रक्षासूत्र और अमित धर्मसिंह की कविता- बहनें शांत हैं

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- रक्षासूत्र, जिसका अर्थ है- कच्चे सूत का बना धागा जो हाथ की कलाई में रक्षा कारक मानकर बाँधा जाता है, राखी। प्रस्तुत है अमित धर्मसिंह की कविता-  बहनें शांत हैं
                                                                 
                            

बहनें शांत हैं
सौम्य और प्रसन्नचित्त भी
उनके चेहरे की उजास
कम नहीं हुई
दुनियाभर की
झुलसाहट के बाद ।

बहनें
हमारे हाथ में
बाँधती हैं रक्षासूत्र
करती हैं कामना
हमारी सुरक्षा की ।

बहनें हमारे घर में नहीं रहतीं
ख्याल में नहीं आतीं
सपने में भी कहाँ आती हैं बहनें
पता नहीं
किस चोर दरवाज़े से
ले जाती हैं हमारी बलाएँ ।

माँ की नसीहत
पिता की डाँट
भाई की झल्लाहट के बाद
खुश दिखतीं हैं बहनें
हमारी ख़ुशी के लिए।

हमारी ख़ुशी के लिये
अपनी ख़ुशी
अपने सपने
अपना मन मारती हैं बहनें

बहनें हमारे पास नहीं
साथ होती हैं
अपनी उपस्थिति
दर्ज़ कराये बगैर ।

सच !
हमसे छोटी हों
या बड़ी
हर हाल में
हमसे बड़ी
होती हैं बहनें ॥

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7 घंटे पहले

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