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आज का शब्द: रागिनी और जानकीवल्लभ शास्त्री की कविता- किसने बांसुरी बजाई

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हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है रागिनी जिसका अर्थ है 1. संगीत में किसी राग का स्त्रीलिंग ; किसी राग का परिवर्तित रूप 2. जयश्री नामक लक्ष्मी। कवि जानकीवल्लभ शास्त्री ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

जनम-जनम की पहचानी वह तान कहां से आई
किसने बांसुरी बजाई

अंग-अंग फूले कदंब सांस झकोरे झूले
सूखी आंखों में यमुना की लोल लहर लहराई !
किसने बांसुरी बजाई

जटिल कर्म-पथ पर थर-थर कांप लगे रुकने पग
कूक सुना सोए-सोए हिय मे हूक जगाई !
किसने बाँसुरी बजाई

मसक-मसक रहता मर्मस्थल मरमर करते प्राण
कैसे इतनी कठिन रागिनी कोमल सुर में गाई !
किसने बांसुरी बजाई

उतर गगन से एक बार फिर पी कर विष का प्याला
निर्मोही मोहन से रूठी मीरा मृदु मुस्काई !
किसने बांसुरी बजाई

5 वर्ष पहले

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