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आज का शब्द: प्रवाल और धर्मवीर भारती की कविता 'ये अनजान नदी की नावें'

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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - प्रवाल जिसका अर्थ है 1. मूंगा 2. नया कोमल पत्ता 3. वीणा की लकड़ी। कवि धर्मवीर भारती ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

ये अनजान नदी की नावें
जादू के से पाल
उड़ातीं
आतीं
मन्थर चाल।

नीलम पर किरणों
की साँझी
एक न डोरी
एक न माँझी,
फिर भी लाद निरन्तर लातीं
सेन्दूर और प्रवाल!

कुछ समीप की
कुछ सुदूर की,
कुछ चन्दन की
कुछ कपूर की,
कुछ में गेरू
कुछ में रेशम
कुछ में केवल जाल।

ये अनजान नदी की नावें
जादू के से पाल
उड़ातीं
आतीं
मन्थर चाल।

एक वर्ष पहले

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